milap singh bharmouri

milap singh bharmouri

Thursday, 11 September 2014

Bharmoura ri jatra

भरमौरा री जात्रा
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जात्रा  हेरी  पर  होर  जिनि  थी  वजा
भीड  ता  मती  थी  पर  मजा  ना  आ
चोले  डोरे  वाले ता बडे  ही  घट  थीए
कजो  करना लगूरे  कल्चरा सोगी दगा

----------- मिलाप सिंह भरमौरी

Tuesday, 9 September 2014

मणिमहेश ट्रस्ट

मणिमहेश ट्रस्ट
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श्रद्धा के लिए कोई भय नहीं है
श्रद्धा के लिए दिन तय नहीं है
रिवाजों के लिए दिन बने हैं
भक्ति के लिए दिन तय नहीं है

देखो आज भी जा रहे हैं मतवाले
भोले के दर्शन के दिवाने
मणिमहेश की ओर चले हैं
होकर सारे खतरों से अनजाने

यात्रा का कोई संचालक नहीं हैं
विपत्ति में कोई तारक नहीं हैं
बिस्तर में सिमट के बैठ गए हैं
सारा चढावा चट करने वाले

अब पुरानी व्यवस्था बदलनी होगी
एक जिम्मेदार ट्रस्ट की स्थापना करनी होगी
जो करवा सके लगातार यात्रा का संचालन
सब लोगों को हामी भरनी होगी

मणिमहेश झील बनवाई पांडवों ने
आज्ञातबास के दौरान
भरमौर के मंदिर बनवाए राजा ने
देश हो गया कब का आजाद
फिर भी मंदिरों का संचालन
क्यों है पहले जैसा आज

दान चढावा सब ट्रस्ट को दो
और पुजारी चेलों को सिर्फ भत्ता दो
तभी हो सकेगा नव व्यवस्था का निर्माण
और जो खडे चढावे की लाईन में
उनकी ओर करो न तनिक ध्यान

तभी भक्तों को सुविधाएं मिल पाएगी
और छ: महीने के लिए
तभी यात्रा खुल पाएगी

-------- मिलाप सिंह भरमौरी

Sunday, 7 September 2014

णुहा न बनदी धियुआ

णुहा न बनदी धियुआ कदी
भौंए लाई लेया ललड लपड
अपना जिना रंग दसिए गंदी
लाई गंदी अकली रा थप्पड
बस अपना टैम तू कट मिलापा
बनी करी दुनिया मंज जक्कर

-------- मिलाप सिंह भरमौरी

मेरी कविता तांए तुसे ऐस पेजा जो लाइक करा ।

चौरासी या पच्चासी मंदिर

चौरासी या पच्चासी मंदिर
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अक गल मना मंज पुडदी हा
इंदे बजुर्गे गलती करूरी हा
चौरासी मंज पच्चसीवा मंदिर
ते मंदिरा मंज भी मूर्ति रखूरी हा

असे भगवाना री पूजा करदे ने भाइयो
मनू री पूजा न भुंदी धर्मा मंज
समाधी ता हाउदर भी बनी सकदी थी
के जगह मुकी गई थी भरमौरा मंज

मंदिरा कनारी मुंह करा सब
जने भी भगवाना री पूजा करदे हिन
कजो समाधि कनारी मुंह करी करी
सब संझा आरती करदे हिन

सोचा जरूर मेरी गल्ला जो
के मेरी गल्ला मंज सच्चाई हा
खरी न लगी ता पुछी लेया बजुर्गा जो
पुछने मंज भला के बुराई हा

-------- मिलाप सिंह भरमौरी

Monday, 25 August 2014

मणिमहेश यात्रा

भरमौर को समृद्ध बनाने के लिए
और हिन्दू धर्म में आस्था
बढाने के लिए
मणिमहेश यात्रा की अवधि
बढाना जरूरी है
पर इसमें प्रशासन की भी
क्या मजबूरी है

मणिमहेश यात्रा
जून से लेकर अक्टूबर तक
बडी आसानी से चल सकती है
भक्तों की टोलियाँ
दुनिया के दुर्लभ पंचमुखी
प्राकृतिक शिवलिंग के
दर्शन कर सकती हैं

पर्यटन को बढाने से
भरमौर का ही नहीं
पूरे हिमाचल में विकास बढेगा
देवभूमि की आबोहवा में
हिन्दू धर्म का
और भी प्रकाश बढेगा

सिर्फ सडकों की ही
तो कमी है
और पार्किंग की उचित
व्यवस्था नहीं है
सब कुछ बदल सकता है
अगर इस ओर थोडा सा
ध्यान आ जाए
बस इइतने में ही इलाके में
विकास का उफान आ जाए

----- मिलाप सिंह भरमौरी

Saturday, 23 August 2014

मणिमहेश

भोले के जयकारों से गूँज रही
भरमौर की पवित्र नगरी
माहौल खराब करने में
जुटे हुए है एच पी पी के प्रहरी

नशे में धुत बिन वर्दी के
बरसा रहे निहत्थों पर दंडे
लगता है शांत स्थल को देख कर
हो गए हैं यह नौसिखिए अंधे

रात के दो बजे बंद कर दिया
चौरासी का मुख्य द्वार
क्या इनके अधिकारियों ने
पढा नहीं है कबीले का सभ्याचार

सिर्फ बीस दिन की जिम्मेदारी
को भी यह नहीं निभा पा रहे हैं
बडे बडे बादे में जो
भरमौर को पर्यटन नगरी बना रहे हैं

अभी तो तीन लाख भक्त ही आए हैं
अभी से यह बौखला गए हैं
अगर तीन महीने के लिए
मणिमहेश यात्रा का जिम्मा लेना पडा तो
सोचो इनका क्या हाल हो जाएगा

-------- मिलाप सिंह भरमौरी

( मणिमहेश यात्रा को अगले साल से तीन महीनों के लिए खोला जाना चाहिए। ताकि अधिक से अधिक भक्त पंचमुखी प्राकृतिक शिवलिंग के दर्शन कर सके। )

Monday, 18 August 2014

इची पुज्जू भरमौर

इची पुज्जू भरमौर
लगी गे न बडे लहौर
मिट्ठे हिन बडे सेऊ
खाने असू बडे खौड

गाणा असू डला जो
पुण कमाना
हेरा पुर लानी टोपी
चोला डोरा लाना

चौरासी मंज हंडना
ते जात्रा भी हेरनी
पैतर गुछूरी भेडा
उटालनी ते केरनी

----- मिलाप सिंह भरमौरी